2024 में नरसिंह जयंती कब ह Narsingh jyanti katha और नरसिंह जयंती की कथा क्या है

 जैसा कि आप लोग जानते हैं भगवान विष्णु ने अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए समय-समय पर अनेकों बार इस पृथ्वी में "लिया अलग-अलग अवतारों के रूप में अपने भक्तों का उद्धार किया उन्हें में से भक्त प्रहलाद का उद्धार करने के लिए भगवान को भक्त प्रहलाद के पिता कश्यप को मृत्यु दंड देने के लिए नरसिंह का रूप धारण किया नरसिंह का अर्थ है आधा न और आधा शेर

तो दोस्तों इस साल नरसिंह जयंती की तिथि अंग्रेजी मां मैं महीने की 21 तारीख को वैशाख शुक्ल पक्ष त्रयोदशी tithi ko Narsingh Jayanti बनाई जाएगी

नृसिंह जयंती की कथा 

जैसे कि आप लोग जानते हैं सनातन में भगवान विष्णु के 24 अवतार हुए हैं उन 24 अवतार में भगवान ने अलग-अलग युग और अलग-अलग कप में अलग-अलग रूप में अलग-अलग भक्तों का उपकार करने के लिए अवतार धारण किया उन्हें में से एक अवतार है भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार तो आईए जानते हैं आज की इस लेख में भगवान का नरसिंह अवतार के बारे में जानते हैं भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की कहानी ऋषि कश्यप और उनकी पत्नी दिति के दो पुत्रों से आरंभ होती है। हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष – दोनों ही पुत्र अपनी प्रार्थनाओं से भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने में सक्षम थे, उन्हें बदले में एक वरदान दिया गया, जिसने दोनों को अजेय बना दिया।

हिरण्यकश्यप  ज्यादा सर्वशक्तिमान हो गया। उसने ब्रह्मा द्वारा प्रदान की गई शक्तियों के साथ विश्व के तीनों लोकों को जीतना शुरू कर दिया और स्वर्ग पर विजय प्राप्त करने की ठान ली। भगवान विष्णु ने वराह के अवतार में हिरण्याक्ष को परास्त किया। इस दिन को वराह जयंती के रूप में मनाया जाता है।

क्योंकि हिर्नाकश्यप को भगवान ब्रह्मा द्वारा वरदान प्राप्त था इसलिए उसको देवताओं द्वारा हर करना संभव नहीं था लेकिन ब्रह्मा से प्राप्त वरदान के कारण देवता हिरण्यकश्यप को हराने में असमर्थ थे। उस वरदान में हिरण्यकश्यप ने यह माँगा था की उसे न कोई मनुष्य मार पाए न ही पशु, न ही वह घर के अंदर मृत्य को प्राप्त हो और न ही घर के बाहर, उसे न ही दिन में मारा जा सके और न ही रात्रि में।

हिरण कश्यप को अहंकार हो गया था हिरण्यकश्यप को एक पुत्र प्रहलाद का भी आशीर्वाद मिला, जो भगवान नारायण का अनन्य भक्त था। केरल कश्यप अपने को सर्वशक्तिमान समझता था वह अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान की भक्ति नहीं करना देना चाहता था हिरण्यकश्यप खुद को ईश्वर मानने लगा था, इसीलिए अपने पुत्र की नारायण भक्ति उसे रुष्ट कर देती थी। लेकिन हिरण्यकश्यप के बहुत से प्रयासों के बावजूद, उनका पुत्र भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। उस बालक की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने प्रह्लाद को कोई हानि नहीं होने दी। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र की भक्ति से क्रोधित होकर उस बालक को जलाकर मारने का निश्चय किया। उसने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठने के लिए कहा। किंवदंती है कि होलिका को कभी भी आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। इसीलिए होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठने के लिए तैयार हो गई। लेकिन जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई भगवान विष्णु के आशीर्वाद से भक्त प्रह्लाद बच गया और होलिका को जलकर अग्नि में भस्म हो गई। तभी से रंगों के त्योहार होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन किया जाता है। वह भक्त प्रहलाद को मारने की नाना प्रकार की योजनाएं बनाते रहता था योजना बनाते रहता था

भक्त प्रह्लाद को मरने की योजना में की गई अपनी सभी क्रूर योजनाओं की विफलता और हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान विष्णु हर जगह और हर चीज में विद्यमान है, यहां तक ​​कि इस महल के स्तंभों में भी हैं। यह सुनकर जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में एक स्तंभ पर प्रहार किया तो एक स्तंभ से भगवान विष्णु नृसिंह  के भयानक रूप में प्रकट हुए। भगवान विष्णु ने इस नृसिंह  अवतार ने हिरण्यकश्यप का वध किया था और इसी तिथि को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है।L इस दिन भगवान विष्णु ने अपने प्रिय भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए पृथ्वी में नरसिंह रूप में अवतार लिया इसी दिन से इस दिन को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है और भगवान की उसे नरसिंह विकराल रूप का पूजन किया जाता है तो दोस्तों आज के इस ब्लॉक में भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की कथा का वर्णन का सरवन किया यदि आपको मेरा यह ब्लॉक पसंद आया तो और भी इस प्रकार की कथाओं को सुनने या पढ़ने के लिए आप हमारे ब्लॉक को सब्सक्राइब कीजिए और कमेंट कीजिए धन्यवाद जय श्री राम

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