गणेश जी के जन्म की कथा Ganesh ji ki janam Katha


 गणेश जी के जन्म की कथा (शिव महापुराण के अनुसार)


गणेश जी का जन्म एक और महत्वपूर्ण प्रसिद्ध कथा है, जिसका शिव महापुराण में विस्तार से वर्णन किया गया है। यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है, जो भगवान गणेश की भावना का आधार है। इस कथा में देवी पार्वती की ममता, भगवान शिव की महानता, और गणेश जी के जन्म की अद्भुत घटना का वर्णन है, जो सभी भक्तों के लिए प्रेरणादायक है।


पार्वती का स्नान और गणेश जी का निर्माण


शिव महापुराण के अनुसार, एक समय की बात है, जब भगवान शिव अपना ध्यान मगन थे और देवी पार्वती कैलाश पर्वत पर अपने कक्ष में निवास कर रही थीं। एक दिन माता पार्वती स्नान करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन (हल्दी और तेल) का एक पिंड बनाया। माता पार्वती ने उस पिंड को अपने हाथों से आकार दिया और प्राणों का संचार किया। इस प्रकार, वह पेंड़ से एक सुन्दर और बलशाली बालक उत्पन्न हुआ, जिसे माता ने अपने पुत्र के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम 'गणेश' रखा।


गणेश जी को माता पार्वती ने आदेश दिया कि वे स्नान के दौरान किसी को भी उनके कक्ष में प्रवेश न दें। गणेश जी ने माता के इस आदेश का पालन करने का दृढ़ निश्चय किया और कक्ष के द्वार पर पहरा दिया। इसी प्रकार के अन्य कथाओं के लिए यहां पर क्लिक करें


 भगवान शिव और गणेश जी के दर्शन


जब माता पार्वती स्नान कर रही थीं, उसी समय भगवान शिव वहां पधारे। भगवान शिव अपने कक्ष में प्रवेश करना चाहते थे, लेकिन द्वार पर गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। गणेश जी ने कहा कि माता पार्वती के आदेश के बिना वे किसी को भी अंदर नहीं जाने देंगे, वह भी कोई हो। भगवान शिव ने इस बालक का साहस और अद्भुत चमत्कार देखा, क्योंकि किसी ने पहले उन्हें इस प्रकार नहीं दिखाया था। 


भगवान शिव ने गणेश जी से अपना परिचय देते हुए कहा कि वे इस कक्ष के स्वामी और माता पार्वती के पति हैं, इसलिए उन्हें अंदर दिया जाए। लेकिन गणेश जी अपने स्थान पर अडिग रहे और कहा कि माता पार्वती के आदेश के बिना कोई भी अंदर नहीं जा सकता, क्योंकि वह स्वयं भगवान शिव ही क्यों नहीं हैं।


देवताओं की सहायता


गणेश जी की इस कहावत से भगवान शिव नाराज हो गए। उन्होंने कई बार गणेश जी की फिल्में बनाने की कोशिश की, लेकिन जी ने किसी की बात गणेश नहीं मानी। तब भगवान शिव ने गणेश जी के इस अद्भुत साहसिक कार्य को देखने के लिए देवताओं से सहायता प्राप्त की। इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु जैसे सभी देवताओं ने गणेश जी को किसी भी प्रकार से झटका देने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी ने किसी भी प्रकार से झटका नहीं दिया और उन्होंने सभी देशों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।


भगवान शिव का क्रोध और गणेश जी का सिर विच्छेद


जब भगवान शिव ने देखा कि गणेश जी किसी भी कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहे हैं और देवताओं की सहायता भी विफल हो गई है, तो अत्यंत क्रोधित हो गए। क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया। गणेश जी का सिर कटते ही उनका शरीर निर्जीव पृथ्वी पर गिर गया।


माता पार्वती का शोक और गणेश जी का पुनर्जन्म



जब माता पार्वती को गणेश जी की मृत्यु का समाचार मिला, तो वे अत्यंत शोककुल हो गये। उन्होंने भगवान शिव से अपने पुत्र को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया। माता पार्वती का शोक और विलाप देखकर भगवान शिव का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने गणेश जी को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। 


भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा में किसी प्राणी का सिर ले आएं, जिससे गणेश जी का पुनर्जन्म हो। गण शिव के ऑर्डर विक्रेता उत्तर दिशा में गए और उन्हें सबसे पहले एक हाथी का सिर मिला। वे उस हाथी का सिर भगवान शिव के पास ले आये। भगवान शिव ने उस सिर को गणेश जी के शरीर से जोड़ा और उनके प्राणों का संचार किया। इस प्रकार, गणेश जी का पुनर्जन्म हुआ और वे हाथी के सिर वाले देवता के रूप में चले गये।


गणेश जी का नाम और आशीर्वाद


गणेश जी के पुनर्जन्म के बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें आशीर्वाद दिया। भगवान शिव ने गणेश जी को "गणों के स्वामी" का पद प्रदान किया और उन्हें "गणपति" की डिग्री दी। इसके साथ ही, भगवान शिव ने यह भी आशीर्वाद दिया कि जी सभी देवताओं और गणेश के कार्यों में सबसे पहले पूजा करेंगे। इस प्रकार गणेश जी को "विघ्नहर्ता" के रूप में जाना जाता है, जो सभी विघ्नों और देवताओं को दूर करते हैं।


गणेश जी की महिमा


गणेश जी के जन्म की यह कथा हमें सिखाती है कि आप सच्ची निष्ठा, साहस और दान से हर व्यक्ति का सामना कर सकते हैं। गणेश जी को उनकी बुद्धि, विवेक और शक्ति के लिए पूजा जाता है। वे ज्ञान, समृद्धि और सुख के देवता हैं। उनकी पूजा से हर शुभ कार्य सफल होता है और जीवन में आने वाले बच्चों को दूर करने की शक्ति मिलती है।


इस प्रकार शिव महापुराण में वर्णित गणेश जी के जन्म की कथा हर भक्त के लिए प्रेरणा स्रोत है। भगवान गणेश का आशीर्वाद सदैव हमारा साथ रहे और हम सभी हुनियों को जीवन का सामना करने की शक्ति प्रदान करें।


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भगवान गणेश का जन्म एक दिव्य घटना है, जो हमारे जीवन में सच्ची निष्ठा और साहस की शिक्षा प्रदान करती है। उनका बिना कोई भी शुभ कार्य शुरू नहीं हुआ, क्योंकि वे सभी विघ्नों का नाश करने वाले हैं। शिव महापुराण की इस कथा से हमें यह भी सीख मिलती है कि भगवान की कृपा और आशीर्वाद से जीवन का सुख दूर हो सकता है। गणेश जी की कृपा करें आप सभी भगवान बने रहें।

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