Arti kitnibar karni chahiye आरती के नियम! कितने प्रकार की होती है आरती

  



भगवान की आरती कितने प्रकार की होती है और आरती क्यों की जाती है

 जैसा कि आप सभी ने सुना है कि आरती का नाम क्या है और आप सभी अपने-अपने घरों में स्थित कार्यालयों में हर जगह आरती करते होंगे, लेकिन हममें से कितने लोगों को पता है कि आरती का सही तरीका क्या है? आरती कितने प्रकार की होती है और आरती कब-कब करनी चाहिए भगवान की आरती कैसी होती है शायद हममें से अधिकांश लोगों को भगवान की पूर्ण आरती का ज्ञान नहीं है तो आइए जानते हैं आज के इस लेख में हम भगवान की आरती क्यों करते हैं और भगवान की आरती कितने प्रकार की होती है और आरती में ध्यान देने वाली कुछ महत्वपूर्ण बातें





आरती कितने प्रकार की होती है:-- भगवान की आरती मुख्य रूप से सात प्रकार की होती है नंबर एक 

1....मंगला आरती 
2....पूजा आरती
3....श्रृंगार आरती  
4....भोग आरती 
5....धूप आरती 
6...संध्या आरती
 7... सायन आरती  

जिस प्रकार से हम अपने नित्य कर्म करते हैं, सुबह से शाम तक हमारे नाना प्रकार की आरती करते हैं, इस प्रकार से भगवान का भी हमें नित्य कर्म करना चाहिए, प्रातःकाल भगवान को मंगल गायन से जगाने से लेकर साइन कर आरती और उसके बाद भगवान शयन आरती के बाद आराम से सुलाना चाहिए जिस प्रकार से भक्ति के मन में भाव भगवान के प्रति जीवन प्रभाव होना चाहिए अपने साध्य को संजीव समझकर उनके दर्शन करना चाहिए उनके स्नान के कारण उनका तिलक करना चाहिए और भोग अर्पण करना चाहिए उनके नाना प्रकार से सजावट करके सिंगार करें 

और अपने प्यारे से सोने के समय में भगवान को भी शयन आरती के बाद सुलाना को एक भक्त को अपने आराध्य पर एक जीवित काल्पनिक करतब दिखाना चाहिए जो हमें भजन माटी प्रिय को बुलाए। प्रेम से भोग लगे भगवान सदा भाव के साथ होते हैं और उनके भक्तों के सीधे भाव में प्रवाहित हो जाते हैं और प्रसन्न हो जाते हैं रात के

  आरती के दौरान ध्यान में रखने वाली बातें 

1.  आरती करते समय भगवान को चार बार चरणों में पर दो बार नाभि क्षेत्र में एक बार मुख मंडल में और सात बार भगवान की सभी अंगों की आरती को घुमाई कुल मिलाकर 14 बार भगवान की आरती घुमाई

2.  आरती करने की पश्चात पंच प्रदीप जिसे भगवान की आरती करते हैं उसको यथास्थान किसी थाली या प्लेट में रखें भूमि पर ना रखें आरती करते समय दीपक का मुंह   दैव पूर्व की ओर होना चाहिए और

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