सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है जिस प्रकार अन्य धर्म में अपने-अपने आराधों का अलग-अलग रूप से चिंतन व प्रार्थना की जातीमनन है इस प्रकार से सनातन धर्म में भगवान की आरती का बहुत महत्व है आरती करने से भगवान की भक्तों पर बड़ी कृपा होती है और भगवान का सानिध्य प्राप्त होता है तो आईए जानते हैं आज के लेख में भगवान शंकर जी की आरती के बारे में वैसे तो सनातन में सब देवों की अलग-अलग रूप से भी आरती उपलब्ध है लेकिन भगवान शिव जी की यह आरती फिर गुनी आरती कहलाती है फिर गुनी अर्थात ब्रह्मा विष्णु और महेश तीन रूप में भगवान की आरती गाई जाती है
शंकर जी की आरती करने से पहले ध्यान में रखने वाली बातें
1.सबसे पहले आरती करने से पहले हमको स्नान और ध्यान कर लेना चाहिए उसके बाद पवित्र मन से भगवान की मूर्ति के आगे पवित्र होकर हमें भगवान का चिंतन करना चाहिए और भगवान की आरती के लिए तैयारी करनी चाहिए आरती में
2.प्रयुक्त होने वाली कुछ सामग्री हमारे पास उपलब्ध हो जैसे धूप दीप नावेद शंकर घंटा बेलपत्र और अन्य इस प्रकार की पूजन सामग्री
3.आरती करने से पहले एक लोटे में शुद्ध जल लेना चाहिए और कुछ अक्षत तिलक के लिए चंदन रोली आदि का प्रबंध कर लेना चाहिए
शंकर भगवान की आरती
ओम जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा !
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्धांगी धारा !!
ओम जय शिव ओंकारा
ए कानन चतुरानन पंचानन राजी ! स्वामी
हां शासन गरुड़ासन वृषभ वहां सजी !!
ओम जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज 10 भुज अति सोहे !
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे !!
ओम जय शिव ओंकारा
अक्षय माला बनमाला रुद्रमाला धारी !
चंदन मृगमत सोहे बाली शशि धारा !!
ओम जय शिव ओंकारा
श्वेतांबर पीतांबर बागमबर एंगे !
संकडिक ब्रह्मादिक भूत अधिक संगे!!
ओम जय शिव ओंकारा
काशी में विश्वनाथ विराजत नंदा ब्रह्मचारी !
नित उठ भोग लगावत महिमा अति भारी!!
ओम जय शिव ओंकारा
त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल Pavi
ओम जय शिव ओंकारा
आरती के बाद भगवान का चरण अमित और भगवान का प्रसाद का वितरण करना चाहिए और सभी लोग जो आरती में सम्मिलित हुए हैं सबको भगवान की आरती दिखानी चाहिए और सब पर भगवान की आरती की कृपा प्रदान करनी चाहिए


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