निर्जला एकादशी व्रतNirjala Ekadashi vart
निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन बनाया जाता है इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है यह एक निर्जला एकादशी है निर्जला एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है इस दिन निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है ऐसा माना जाता है कि यह व्रत पांचो पांडवों में भीमसेन ने भी किया था महर्षि वेदव्यास जी ने भीमसेन को इस व्रत करने की प्रेरणा बताई थी इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है
इस वर्ष कब है निर्जला एकादशी 2024 में kab hai Nirjala Ekadashi vart--
उदया तिथि के आधार पर 18 जून को निर्जला एकादशी व्रत मनाया जाएगा इस वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि अंग्रेजी तिथि 17 जून को 4:45 से 18 जून प्रातः 7:28 पर एकादशी तिथि बन रही है
निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय
जो लोग 18 जून को निर्जला एकादशी व्रत करते हैं वह 19 जून प्रातः 5:24 से 7:28 के बीच पारण का समय बन रहा है तदुपरांत द्वादशी समाप्त हो जाएगी
निर्जला एकादशी व्रत करने का महत्व
निर्जला एकादशी व्रत करने के अनेक लाभ होते हैं यदि वह पूरे वर्ष की एकादशी का व्रत नहीं कर पाता है तो किसी कारण से उसे व्यक्ति को यदि ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी मिलती है। निर्जला एकादशी व्रत करने के अनेक लाभ होते हैं यदि वह पूरे वर्ष की एकादशी करने का पुण्यफल प्राप्त करता है और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करता है तो व्यक्ति को बकुंठ वास होता है।
निर्जला एकादशी व्रत को भीम सैनी एकादशी या पांडव एकादशी क्यों कहा जाता है?
एक बार की बात है जब महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास जी पांडवों के पांचो भाइयों को एकादशी व्रत का महत्व समझ रहे थे कि एकादशी व्रत करने से व्यक्ति की समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति समस्त पाप को नष्ट करते हुए बचुंठ प्राप्त करता है तब बीच में अचानक भीमसेन जी ने महर्षि वेदव्यास जी को प्रार्थना की भीमसेन जी ने कहा हे पितामह महर्षि आप जो व्रत की विधि बता रहे हो वह तो ठीक है लेकिन मेरी एक समस्या है मेरे चार भाई तो सुखद रख सकते हैं लेकिन मैं दिन भर भूख प्यास नहीं पहन सकता मेरी तरफ एक भूख की अग्नि है जो अत्यधिक भोजन करने से ही शांत होती है इसलिए महर्षि आप कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मैं साल भर भूख ना रहूं और साल में एक बार ही समस्त एकादशी का पुण्य प्राप्त कर लूं तब महर्षि वेदव्यास ने भीमसेन को समझाते हुए कहा प्रिय भीमसेन तुम चिंता मत करो इसका भी एक उपाय है शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत का नियम पवित्र मन से करता है भगवान विष्णु की कृपा से उस व्यक्ति को वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य फल एक ही दिन में प्राप्त हो जाता है और व्यक्ति श्री हरि भगवान विष्णु की कृपा से इस भवसागर से हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसके बाद भीमसेन ने इस व्रत को बड़े विधिपूर्वक किया इसलिए इस व्रत को भीम सैनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं।
निर्जला एकादशी व्रत के दिन ध्यान रखने वाली बातें
1. निर्जला एकादशी व्रत के दिन जल भी ग्रहण न करना
2. निर्जला एकादशी व्रत के दिन हो सके तो पीले वस्त्र धारण करना चाहिए
3.व्रत करने वाले व्यक्ति को कम से कम बोलना चाहिए या चुप रहने की कोशिश करनी चाहिए
4. दिन भर सोना नहीं चाहिए
5.ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए
6.व्रत के दिन झूठ ना बोलें और क्रोध में निंदा ना करें
निर्जला व्रत करने की विधि
निर्जला एकादशी व्रत करने की निम्नलिखित विधि है सर्वप्रथम सूर्योदय में उठकर स्नान करना चाहिए, स्नान करने के लिए साफ पीले वस्त्र धारण करने चाहिए, पूजा स्थल को साफ करें और पूजा स्थल में एक दीपक प्रज्वलित कर व्रत का संकल्प लें, इसके बाद शालिग्राम भगवान को स्थापित करें और पंचामृत से भगवान शालिग्राम को स्नान करने के बाद उन्हें चंदन मिश्री अर्पित करें और पूजा के दौरान शालिग्राम भगवान को 108 तुलसी के पत्ते अर्पित करें, फिर विष्णु भगवान के विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और अंत में आरती के बाद पूजा करें



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